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अर्थराइटिस







  • जो़ड़ो मे दर्द की समस्या को कहते है अर्थराइटिस या गठिया रोग ।
  • जोड़ों के ऊतकों की जलन और क्षति के कारण होता है अर्थराइटिस।
  • इसको जांचने के लिए कराते है यूरिक एसिड, साइनोवियल फ्लूड टेस्ट।
  • अर्थराइटिस पर्याप्त मात्रा में पीयें पानी,धूम्रपान से करना चाहिए परहेज।
  • अर्थराइटिस यानि गठिया रोग व जोड़ो का दर्द। आज की बदलती जीवनशैली, मोटापा, गलत खानपान आदि वजहों से ये रोग अब केवल बुजुर्गो तक हीं सीमित नहीं रह गया है। बल्कि युवा भी इसका शिकार होते जा रहे है। अर्थराइटिस का सबसे अधिक प्रभाव घुटनों में और उसके बाद कुल्हे की हड्डियों में दिखाई देता है।बहुत लोग समय–समय पर अपने बदन में दर्द और अकडन महसूस करते हैं । कभी–कभी उनके हाथों, कंधों और घुटनों में भी सूजन और दर्द रहता है तथा उन्हें हाथ हिलाने में भी तकलीफ होती है । ऐसे लोगों को अर्थराइटिस हो सकता है।

    अर्थराइटिस

    क्या होता है अर्थराइटिस

    अर्थराइटिस जोड़ों के ऊतकों की जलन और क्षति के कारण होता है । जलन के कारण ही ऊतक लाल, गर्म, दर्दनाक और सूज जाते हैं। यह सारी समस्या यह दर्शाती है की आपके जोड़ों में कोई समस्‍या है। जोड़ वह जगह होती है जहां पर दो हड्डियों का मिलन होता है जैसे कोहनी या घुटना । कुछ तरह के अर्थराइटिस में जोड़ों की बहुत ज्यादा क्षति होती है।


    अर्थराइटिस के लक्षण

    शुरुआत में मरीज को बार-बार बुखार आता है, मांसपेशियों में दर्द रहता है, हमेशा थकान और टूटन महसूस होती है, भूख कम हो जाती है और वजन घटने लगता है।शरीर के तमाम जोड़ों में इतना दर्द होता है कि उन्हें हिलाने पर ही चीख निकल जाए, खासकर सुबह के समय। इसके अलावा शरीर गर्म हो जाता है, लाल चकत्ते पड़ जाते हैं और जलन की शिकायत भी होती है। जोड़ों में जहां-जहां दर्द होता है, वहां सूजन आना भी इस बीमारी में आम है। जोड़ों के इर्द-गिर्द सख्त गोलाकार गांठें जैसी उभर आती हैं, जो हाथ पैर हिलाने पर चटकती भी हैं। शरीर के किसी भी अंग को हिलाने पर दर्द, जलन और सूजन की तकलीफ झेलनी पड़ती है।

    अर्थराइटिस

    ऐसे लगाएं अर्थराइटिस का पता

    कुछ प्रमुख जांचों के आधार पर इस रोग का पता लगाया जाता है। खून में यूरिक एसिड का स्तर अगर ज्यादा है, तो इसका मतलब है कि व्यक्ति गाउटी अर्थराइटिस से पीड़ित है।साइनोवियल फ्लूड, इसे श्लेष द्रव भी कहते हैं, जो जोड़ों के बीच पाया जाता है। जोड़ों के अंदरसे इस द्रव को लेकर इसका टेस्ट किया जाता है जिसमें,मोनोसोडियम युरेट क्रिस्टल पाए जाते हैं।कभी-कभी यूरिक एसिड मूत्र में भी पाया जाता है, जिसके टेस्ट से गाउटी अर्थराइटिस का पता लगाया जा सकता है। जिस जगह पर सूजन होती है उसका एक्सरे किया जाता है। एडवांस गाउटी अर्थराइटिस में एक्सरे पॉजिटिव हो जाता है।


    अर्थराइटिस के रोगी को मांसाहार, दाल, पनीर और टमाटर के साथ ही शराब और धूम्रपान से परहेज करना चाहिए।पोषणयुक्त आहार का सेवन करना चाहिए। पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं। मोटापे से ग्रस्त हैं, तो वजन कम करें।

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